ओडिशा सरकार ने ‘हरिजन’ शब्द पर लगाया प्रतिबंध
परिचय | Introduction
ओडिशा सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है: सरकारी संचार, दस्तावेज़, जाति प्रमाण पत्र, और शैक्षणिक रिकॉर्ड में ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर संविधानिक और सम्मानजनक शब्दों—जैसे ‘Scheduled Caste’ (अंग्रेज़ी में) और ‘अनुसूचित जाति’ (ओड़िया व अन्य भाषाओं में)—का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रतिबंध 12 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है।
निर्णय के पीछे कारण | Why This Ban Was Instituted
ओडिशा मानवाधिकार आयोग (OHRC) द्वारा लिए गए प्रस्तावों और कोर्ट-स्थित आदेशों के आधार पर यह कदम उठाया गया, जिसमें “हरिजन” को अपमानजनक और असंवैधानिक माना गया है। यह फैसला सामाजिक न्याय और संवैधानिक गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।
यह आदेश किन पर लागू होगा? | Scope of the Directive
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश निम्न स्थानों पर लागू होगा:
- सभी सरकारी संचार और रिकॉर्ड
- जाति प्रमाण पत्र
- विभागीय नाम, वेबसाइट्स, पत्राचार
- शैक्षणिक संस्थाओं की दस्तावेज़ सामग्री
उपरोक्त सभी में अब “Scheduled Caste” या “अनुसूचित जाति” ही उपयोग किया जाएगा। सर्वसाधारण प्रणालियों को अपडेट करने और कर्मचारियों को नई भाषा की जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश भी जारी किया गया है।
सामाजिक और संवैधानिक महत्व | Social and Constitutional Significance
- ‘हरिजन’ शब्द महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन समय के साथ उसे सामाजिक अपमानजनक अर्थ से जोड़ा गया।
- सुप्रीम कोर्ट और अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि Scheduled Castes के सम्मान को बरकरार रखा जाए।
- यह निर्णय एक संवैधानिक, मानवीय और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
अगला कदम और भूमिका | Next Steps and Responsibilities
- अनुमति दी गई है कि सभी विभाग मौजूदा दस्तावेजों को संशोधित करें और नए में सुधार करें।
- अधिकारियों को कर्मचारियों को इस भाषा परिवर्तन के प्रति चेतना और प्रशिक्षण देना अनिवार्य है।
- उनसे सम्पूर्ण पालन (compliance) रिपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया गया है।
निष्कर्ष | Conclusion
ओडिशा सरकार द्वारा ‘हरिजन’ शब्द के उपयोग पर प्रतिबंध एक समाजोपयोगी और संवैधानिक निर्णय है, जो Scheduled Castes के सम्मान को बढ़ावा देता है और सामाजिक भाषा में गरिमा लाता है। यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि एक मानवीय सोच में बदलाव का प्रतीक है।
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