New Blood Discovery: The World’s Rarest Blood Group ‘Gwada Negative’.

दुनिया का सबसे दुर्लभ रक्त समूह ‘ग्वाडा नेगेटिव’: एक वैज्ञानिक खोज.

Introduction | प्रस्तावना

2025 में कैरिबियाई द्वीप ग्वाडेलूप (Gwada) की एक महिला में पाया गया नया रक्त समूह ‘Gwada Negative’, जिसे मीडिया में M-नेगेटिव भी कहा गया। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) ने जून 2025 में इसे 48वीं रक्त समूह प्रणाली के रूप में मान्यता दी। इस खोज ने दुर्लभ रक्त समूह वाले मरीजों के लिए नए अवसर खोल दिए हैं।

Discovery Background | खोज की पृष्ठभूमि

  • प्रारंभिक संकेत (2011): नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान महिला के रक्त में एक अज्ञात एंटीबॉडी मिला, जो किसी भी ज्ञात समूह से मेल नहीं खाता था।
  • पुनः विश्लेषण (2019): आधुनिक डीएनए अनुक्रमण (NGS) से जीनोम जाँच में पता चला कि एक अनुवांशिक उत्परिवर्तन (mutation) इस अनूठे एंटीजन की वजह था।
  • औपचारिक मान्यता (2025): फ्रांसीसी रक्त आपूर्ति एजेंसी (EFS) ने ISBT सम्मेलन में इसे PigZ प्रणाली का हिस्सा बताकर ‘Gwada Negative’ नाम दिया।

What is M-Negative Blood Group? | M-नेगेटिव रक्त समूह क्या है?

  • PigZ प्रणाली: इस नए समूह को PigZ नामक प्रणाली में शामिल किया गया, जिसमें फिलहाल केवल यही एक रक्त समूह है।
  • अद्वितीय एंटीजन: इसमें ऐसा एंटीजन पाया गया, जो ABO या Rh समूहों में नहीं मिलता।
  • नामकरण: ‘Gwada’ नाम उस महिला के पैतृक द्वीप ग्वाडेलूप से लिया गया है।

Unique Features | अनोखी विशेषताएं

  • अति दुर्लभ: अब तक केवल एक व्यक्ति में ही पुष्टि हुई।
  • स्व-संगत: इस महिला का रक्त सिर्फ अपनी ही शरीर से फिट हो सकता है।
  • आनुवंशिक विरासत: माता-पिता दोनों में ही वही उत्परिवर्तन पाया गया।
  • विश्व स्तर पर सबसे दुर्लभ: अभी तक दुनिया का सबसे कम पाया जाने वाला मान्यता प्राप्त रक्त समूह।

Clinical Significance | चिकित्सीय महत्व

  • दुर्लभ ट्रांसफ्यूज़न: दुर्लभ समूहों के मरीजों के लिए उपलब्धता बढ़ने का मार्ग बनेगा।
  • रक्तदाताओं का नक्शा: नए समूह की पहचान से रक्त दाताओं के डेटाबेस को और विस्तृत किया जा सकेगा।
  • भविष्य की खोज: आधुनिक अनुक्रमण तकनीक से और दुर्लभ समूह मिल सकते हैं, जैसा कि 2022 में ‘Er’ समूह मिला था।

The Road Ahead | आगे का रास्ता

  1. और खोजें: अन्य देशों में ऐसे लोगों की पहचान।
  2. रक्त बैंक तैयारी: दुर्लभ समूह की रक्त थैलियों का भंडारण।
  3. शोध और सहयोग: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा साझा कर वैश्विक ट्रांसफ्यूज़न नेटवर्क मजबूत करना।

Conclusion | निष्कर्ष

‘M-नेगेटिव’ या ‘Gwada Negative’ रक्त समूह की खोज से यह साबित होता है कि रक्त विज्ञान में अभी भी नई संभावनाएँ छिपी हैं। इन दुर्लभ समूहों की पहचान से मरीजों को सुरक्षित और सटीक ट्रांसफ्यूज़न सुविधा मिल सकेगी, जिससे जीवन बचाने में मदद होगी।

आपकी राय क्या है?

क्या आपको लगता है कि विज्ञान की यह खोज भविष्य की चिकित्सा को पूरी तरह बदल सकती है? अपने विचार नीचे कमेंट सेक्शन में साझा करें।

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