Sheetala Saptami 2025: Significance, Rituals, and Cold Feast Traditions

शीतला सप्तमी 2025: मां शीतला का व्रत, पूजन-विधि और विशेष महत्व

आज का दिन बेहद खास है क्योंकि आज है शीतला सप्तमी। हर साल होली के कुछ ही दिनों बाद आने वाला यह पर्व भारत के कई राज्यों में आस्था और परंपरा से भरा हुआ मनाया जाता है। शीतला माता का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।

आज के दिन व्रतधारी जन, खासतौर पर महिलाएं, शीतला माता की पूजा कर अपने परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस पर्व में एक विशेष परंपरा है – ठंडा भोजन करने की। आज का यह पर्व उत्साह और श्रद्धा से भर देता है क्योंकि यह जीवन में शीतलता, संतुलन और शुद्धता का संदेश देता है।

शीतला सप्तमी का महत्व

शीतला सप्तमी, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। यह त्योहार विशेष रूप से भारत के उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। माना जाता है कि मां शीतला चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा करती हैं

शीतला माता को ठंडक की देवी माना जाता है और यह भी मान्यता है कि वे पितृदोष, महामारी और अन्य रोगों से मुक्ति दिलाती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाए तो गर्मियों की शुरुआत में बासी व ठंडा भोजन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है।

पूजा की शुरुआत कब होती है?

शीतला सप्तमी की पूजा का महत्व इस बात में भी है कि इसकी तैयारी एक दिन पहले, यानी शीतला शष्ठी की रात से ही शुरू हो जाती है। महिलाएं रात में ही सारा भोजन बनाकर रख लेती हैं और सुबह उठकर बिना चूल्हा जलाए मां शीतला को भोग लगाती हैं।

शीतला माता की पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर शीतला माता की पूजा की जाती है। खंडित मूर्ति की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गांव में बैल ने शीतला माता की मूर्ति को तोड़ दिया था। इसके बाद माता ने स्वयं कहा कि अब से मेरी खंडित मूर्ति की भी पूजा होगी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

पूजा की मुख्य प्रक्रिया:

  • मिट्टी या पत्थर की खंडित शीतला माता की मूर्ति को जल से स्नान कराकर स्वच्छ किया जाता है।
  • माता को बासी भोजन जैसे दही, ठंडे पकवान, और मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है।
  • नीम की पत्तियों से माता का श्रृंगार किया जाता है।
  • स्त्रियां विशेष रूप से व्रत रखती हैं और कथा सुनती हैं।

पकवानों की विविधता – शीतला माता का ठंडा भोग

इस दिन का विशेष आकर्षण ‘ठंडा भोजन’ या ‘बासी भोजन’ होता है। महिलाएं एक दिन पहले ही यह पकवान बनाकर रखती हैं और सुबह बिना चूल्हा जलाए माता को भोग लगाकर वही भोजन करती हैं।

आज के दिन बनाए जाने वाले प्रमुख व्यंजन:

  • मीठी रबड़ी
  • तीखी रबड़ी
  • गेहूं और बाजरे की रोटियां
  • आलू और मूंग की दाल के पकोड़े
  • चना और मटर की सूखी सब्जी
  • कढ़ी और चावल
  • पापड़ और मंगोड़ी की सब्जी
  • भुजिया और सेव
  • गुड़-चावल और मीठा भात
  • ठंडी लस्सी और मठ्ठा

यह भोजन पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तनों में रखा जाता है ताकि भोजन में शीतलता बनी रहे।

शीतला सप्तमी से जुड़ी मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

एक मान्यता के अनुसार, शीतला माता चेचक जैसी बीमारियों से बचाने वाली देवी हैं। प्राचीन काल में जब चिकित्सा सुविधाएं कम थीं, तब संक्रमण और महामारी से सुरक्षा के लिए लोग माता की पूजा कर उनसे रक्षा की कामना करते थे। वैज्ञानिक रूप से, मौसम बदलने पर शरीर में बैक्टीरिया और वायरस से मुकाबले के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। बासी और ठंडा भोजन खाने से शरीर को शारीरिक संतुलन और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।

आज का विशेष महत्व

इस वर्ष शीतला सप्तमी पर ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बना है, जो इसे और भी फलदायी बनाता है। कहा जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से न केवल संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य में लाभ मिलता है, बल्कि घर-परिवार में शांति और समृद्धि भी आती है।

शीतला सप्तमी के साथ जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • शीतला माता को अधिकतर नीम की पत्तियों, दही और ठंडे भोजन का भोग पसंद है।
  • इस पर्व पर मिट्टी या पीतल की खंडित मूर्ति की ही पूजा होती है।
  • इस दिन गांवों में लोग जंगल में स्थित शीतला माता के मंदिर जाकर पूजा करते हैं और दिनभर वहीं ठहरकर भोग लगाते हैं।
  • कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ सामूहिक रूप से कथा करती हैं और माता की चौकी सजाती हैं।

उत्सव की सीख

शीतला सप्तमी हमें शीतलता, संतुलन और स्वास्थ्य का महत्व सिखाती है। गर्मियों की दस्तक से पहले शरीर और मन को शांत और ठंडा बनाए रखने का यह एक अद्भुत उदाहरण है। साथ ही, यह त्यौहार सामूहिकता और परिवार के साथ त्योहार मनाने की परंपरा को भी मजबूत करता है।

🎉 फेस्टिवल टिप्स

  • एक दिन पहले ही सारे पकवान बनाकर रखें और मिट्टी के बर्तनों में स्टोर करें।
  • माता को भोग लगाने से पहले पूरे घर को स्वच्छ करें और नीम की पत्तियों से शुद्ध करें।
  • कथा के समय परिवार के सभी सदस्यों को शामिल करें और बच्चों को भी त्योहार का महत्व समझाएं।
  • माता को ठंडे जल से स्नान कराएं और ठंडी चीजों का ही भोग लगाएं।

🙌 Call to Action

आज इस शुभ अवसर पर आप भी शीतला माता की पूजा करें और अपने परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य की कामना करें। क्या आपने इस बार शीतला सप्तमी के पकवान पहले से बना लिए हैं? नीचे कमेंट में बताइए कि आपके घर में इस त्योहार पर कौन-कौन से व्यंजन बनते हैं!

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