ब्रेस्ट कैंसर: कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव के उपाय
परिचय
ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक है। हालांकि यह पुरुषों में भी हो सकता है, लेकिन महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। यह कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ या ट्यूमर का निर्माण करती हैं। यदि इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हम ब्रेस्ट कैंसर के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से समझेंगे, जिसमें इसके कारण, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव के उपाय शामिल हैं।
ब्रेस्ट कैंसर क्या है?
ब्रेस्ट कैंसर एक प्रकार का मैलिग्नेंट (घातक) ट्यूमर होता है, जो स्तन की कोशिकाओं में विकसित होता है। यह कैंसर स्तन के विभिन्न भागों में हो सकता है, जैसे –
- डक्टल कार्सिनोमा (Ductal Carcinoma) – यह सबसे आम प्रकार का ब्रेस्ट कैंसर है, जो दूध ले जाने वाली नलिकाओं (Milk Ducts) में शुरू होता है।
- लोब्यूलर कार्सिनोमा (Lobular Carcinoma) – यह स्तन में दूध बनाने वाली ग्रंथियों (Lobules) में विकसित होता है।
- इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर (Inflammatory Breast Cancer) – यह एक दुर्लभ लेकिन आक्रामक प्रकार का कैंसर है, जिसमें स्तन में सूजन और लालिमा आ जाती है।
ब्रेस्ट कैंसर के कारण
स्तन कैंसर के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़े कारक प्रमुख हैं। कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –
1. आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)
- यदि परिवार में पहले किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो अगली पीढ़ी को भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
- BRCA1 और BRCA2 जीन म्यूटेशन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
2. हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
- एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन के स्तर में बदलाव कैंसर की संभावना बढ़ा सकते हैं।
- देर से मां बनना या बच्चे को स्तनपान न कराना भी एक कारण हो सकता है।
3. जीवनशैली संबंधी कारण (Lifestyle Factors)
- अत्यधिक जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन
- अधिक शराब पीना और धूम्रपान करना
- मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
- देर से विवाह और अधिक उम्र में गर्भधारण
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
- स्तन में गांठ या सूजन – यह गांठ आमतौर पर दर्दरहित होती है और धीरे-धीरे बढ़ती है।
- स्तन का आकार या रंग बदलना – एक स्तन बड़ा या असामान्य रूप से भारी दिख सकता है।
- निप्पल में बदलाव – निप्पल अंदर की ओर धंस सकता है या इससे असामान्य स्राव (डिस्चार्ज) हो सकता है।
- स्तन की त्वचा में बदलाव – त्वचा लाल, मोटी या सिकुड़ी हुई दिखाई दे सकती है।
- बगल (Armpit) में गांठ – ब्रेस्ट कैंसर आसपास की लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) में फैल सकता है, जिससे बगल में सूजन हो सकती है।
ब्रेस्ट कैंसर की जांच (Diagnosis)
- सेल्फ एग्जामिनेशन (Self-Examination) – हर महीने अपने स्तनों को जांचना चाहिए।
- मैमोग्राफी (Mammography) – 40 वर्ष के बाद महिलाओं को साल में एक बार मैमोग्राफी करानी चाहिए।
- बायोप्सी (Biopsy) – ट्यूमर के ऊतक का सैंपल लिया जाता है और उसकी जांच की जाती है।
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज
- सर्जरी (Surgery) – लम्पेक्टॉमी और मास्टेक्टॉमी।
- कीमोथेरेपी (Chemotherapy) – कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए।
- रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) – उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना।
- हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) – एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को नियंत्रित करने के लिए।
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के उपाय
- नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ आहार लें।
- धूम्रपान और शराब से बचें।
- बच्चे को स्तनपान कराएं।
- समय-समय पर जांच कराएं।
निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते इसका समय रहते पता लगाया जाए। अगर हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ, नियमित जांच कराएँ और शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें, तो इस बीमारी को हराया जा सकता है।
क्या आप अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हैं? नीचे कमेंट में अपने विचार साझा करें!
Stay Connected with Us!
Follow us for updates on new courses, offers, and events from Saint Joseph’s Academy.
Don’t miss out, click below to join our channel: